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नज़्म
है आख़िर ज़िंदगी ख़ून अज़-बुन-ए-नाख़ुन बर-आवर-तर
क़यामत सानेहा मतलब क़यामत फ़ाजिआ परवर
जौन एलिया
नज़्म
जिस की नादानी सदाक़त के लिए बेताब है
जिस का नाख़ुन साज़-ए-हस्ती के लिए मिज़राब है
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
कहीं नहीं है कहीं भी नहीं लहू का सुराग़
न दस्त-ओ-नाख़ुन-ए-क़ातिल न आस्तीं पे निशाँ
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
तिरे पूरे बदन पर इक मुक़द्दस आग का पहरा है
जो तेरी तरफ़ बढ़ते हुए हाथों के नाख़ुन रोक लेता है
तहज़ीब हाफ़ी
नज़्म
चाँद क्यूँ अब्र की उस मैली सी गठरी में छुपा था
उस के छुपते ही अंधेरों के निकल आए थे नाख़ुन
गुलज़ार
नज़्म
मोतियों जैसे दाँतों में वो गहरी सुर्ख़ ज़बान
देख के गाल पे नाख़ुन का मद्धम सा लाल निशान
मुनीर नियाज़ी
नज़्म
आनंद नारायण मुल्ला
नज़्म
दिवानी बुलबुलें हों देख गुल चुनने लगीं तिनके
तुम्हारे हाथ ने मेहंदी ने अंगुश्तों ने नाख़ुन ने