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नज़्म
सैकड़ों नख़्ल हैं काहीदा भी बालीदा भी हैं
सैकड़ों बत्न-ए-चमन में अभी पोशीदा भी हैं
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
देर से बैठे हो नख़्ल-ए-रास्ती की छाँव में
क्या ख़ुदा-ना-कर्दा कुछ मोच आ गई है पाँव में
जोश मलीहाबादी
नज़्म
नख़्ल मेरी आरज़ूओं का हरा होने को था
आह! क्या जाने कोई मैं क्या से क्या होने को था!
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
क्या तवक़्क़ो उन से रक्खें फ़ेल जो होते रहे
नक़्ल कर के दाग़ को दामन से जो धोते रहे
सय्यद मोहम्मद जाफ़री
नज़्म
जब लगाया हक़ का नारा दार पर खींचा गया
नख़्ल-ए-सनअ'त इस के ख़ूँ की धार पर सींचा गया
सय्यद मोहम्मद जाफ़री
नज़्म
नख़्ल-ए-उल्फ़त जिन की कोशिश से उगा है क़ौम में
क़ाबिल-ए-तारीफ़ उन की हिम्मत-ए-मर्दाना है
चकबस्त बृज नारायण
नज़्म
माइल-ए-सैर-ए-चराग़ाँ नख़्ल हर जा दम-ब-दम
हासिल-ए-नज़्ज़ारा हुस्न-शम-ए-रूयाँ पै-ब-पै
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
दिल-बंद हम हैं तेरे लख़्त-ए-जिगर हैं तेरे
नख़्ल-ए-मुराद है तौ और हम समर हैं तेरे