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नज़्म
इस शाम-ए-ख़िज़ाँ ने अब तक तो हर तरह से पर्दा-दारी की
जब सुब्ह-ए-बहार आ जाएगी ऐ तंगी-ए-दामाँ क्या होगा
माहिर-उल क़ादरी
नज़्म
राज़दान-ए-ज़िंदगी ऐ तर्जुमान-ए-ज़िंदगी
है तिरा हर लफ़्ज़ ज़िंदा दास्तान-ए-ज़िंदगी
मोहम्मद सादिक़ ज़िया
नज़्म
हक़ीक़त की सहर आख़िर न होगी पर्दा-दर कब तक
मुझे मग़्लूब कर के ख़ुश है तू ज़ालिम मगर कब तक
अख़्तर शीरानी
नज़्म
नीस्त पैग़मबर व-लेकिन दर बग़ल दारद किताब
क्या बताऊँ क्या है काफ़िर की निगाह-ए-पर्दा-सोज़
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
क़स्र-ए-गीती में उमँड आया है तूफ़ान-ए-हयात
मौत लर्ज़ां है पस-ए-पर्दा-ए-दर आज की रात