आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "phaa.nd"
नज़्म के संबंधित परिणाम "phaa.nd"
नज़्म
मनाज़िर सब उसी इक रौशनी पर मुनहसिर हैं
जो दिल की मुंहमिक परतों को जब भी फाँद कर आती है
राम प्रकाश राही
नज़्म
ये ख़त लिखना तो दक़यानूस की पीढ़ी का क़िस्सा है
ये सिंफ़-ए-नस्र हम ना-बालिग़ों के फ़न का हिस्सा है