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नज़्म
सात करोड़ कुर्रे और सूरज के पीले फूलों वाली फुलवाड़ी से इक पत्ती उड़ कर
मेरे मेज़ पर आ गिरती है
मजीद अमजद
नज़्म
फिर वो टूटा इक सितारा फिर वो छूटी फुल-जड़ी
जाने किस की गोद में आई ये मोती की लड़ी
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
अब नाज़ुक नाज़ुक ज़ेहनों पर फ़ौलादी हमला होगा
शीशों के पैकर पिघलेंगे पथरीली तन्हाई में
चन्द्रभान ख़याल
नज़्म
फुलझड़ी से फूल यूँ झड़ते हैं जैसे कहकशाँ
हर तरफ़ फैला फ़ज़ा में है पटाख़ों का धुआँ