आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "qillat-e-siim"
नज़्म के संबंधित परिणाम "qillat-e-siim"
नज़्म
अपने मज़हब के मसाइल से तबीअ'त थी नुफ़ूर
रहते थे ज़िक्र-ए-बुतान-ए-सीम-तन की धुन में चूर
जगत मोहन लाल रवाँ
नज़्म
जिस की तनवीर ने ज़र्रों को 'अता की ताबिश
जिस की तक़रीर ने तोड़ा है तिलिस्म-ए-ज़र-ओ-सीम
क़मर रईस
नज़्म
अब जो उठा है तो बढ़ता ही चला जाएगा
ये ज़र-ओ-सीम के तूदों से नहीं रुक सकता