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नज़्म
सय्यदा शान-ए-मेराज
नज़्म
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
रात आई और जागे तारे
नन्हे मुन्ने छोटे छोटे
आ बैठे हैं मिल कर सारे
रात आई और जागे तारे
सूफ़ी ग़ुलाम मुस्ताफ़ा तबस्सुम
नज़्म
रहम ऐ नक़्क़ाद-ए-फ़न ये क्या सितम करता है तू
कोई नोक-ए-ख़ार से छूता है नब्ज़-ए-रंग-ओ-बू
जोश मलीहाबादी
नज़्म
यकसाँ नज़दीक-ओ-दूर पे था बारान-ए-फ़ैज़-ए-आम तिरा
हर दश्त-ओ-चमन हर कोह-ओ-दमन में गूँजा है पैग़ाम तिरा