आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "rah-e-manzil"
नज़्म के संबंधित परिणाम "rah-e-manzil"
नज़्म
रह-ए-मंज़िल में हम दुश्वारियों का ग़म नहीं करते
गुज़र जाते हैं हँस कर फ़िक्र-ए-पेच-ओ-ख़म नहीं करते
मुनीर वाहिदी
नज़्म
सीटियाँ बजने लगीं ख़िदमत-ए-सरकार बजा लाना है
और सरकार ही ख़ुद संग-ए-रह-ए-मंज़िल है
मोहम्मद दीन तासीर
नज़्म
यही वो मंज़िल-ए-मक़्सूद है कि जिस के लिए
बड़े ही अज़्म से अपने सफ़र पे निकले थे