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नज़्म
वो रश्क-ए-क़मर शब को जहाँ जल्वा-फ़ज़ा हो
उस रात के रौशन के लिए नूर-ए-सहर जाए
इस्मतुल्लाह इस्मत बेग
नज़्म
था कियूब-इज़्म मैं काग़ज़ पे जो इक रश्क-ए-क़मर
मुझ को ईंटें नज़र आती थीं इसे हुस्न-ए-बशर
सय्यद मोहम्मद जाफ़री
नज़्म
ख़ल्वत-ए-ग़म के दरीचों पे ये दस्तक कैसी
ऐ मिरी फ़ख़्र-ए-वफ़ा रश्क-ए-चमन जान-ए-हया
इम्तियाज़ अहमद क़मर
नज़्म
ज़माने की हवा बदली उधर रंग-ए-चमन बदला
गुलों ने जब रविश बदली अनादिल ने वतन बदला
सय्यद तसलीम हैदर क़मर
नज़्म
तेरा मस्कन अर्ज़-ए-दिल्ली रश्क-ए-हुस्न-ए-कोह-ए-क़ाफ़
चाँद-सूरज रोज़ तेरे गिर्द करते हैं तवाफ़
रहबर जौनपूरी
नज़्म
जहाँ की ज़मीं रश्क-ए-चर्ख़-ए-कुहन है
जहाँ शोख़ियाँ हैं अदा है फबन है
कुँवर महेंद्र सिंह बेदी सहर
नज़्म
सर-ज़मीन-ए-पदमनी गहवारा-ए-प्रतापी भीम
रश्क-ए-फ़िरदौस-ए-ज़माना देखने आया हूँ मैं
जयकृष्ण चौधरी हबीब
नज़्म
क़फ़स का दर बना देते हैं रश्क-ए-बाब-ए-आज़ादी
जो अहल-ए-होश हैं 'तकमील' ज़िंदानों में रहते हैं