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नज़्म
ईस्तादा सर्व के साए में थे मौला-ए-रूम
जिन के फ़र्मूदात में मुज़्मर हैं आयात-ए-मुबीं
शोरिश काश्मीरी
नज़्म
अब जो तमसील के एक वक़्फ़े में तुम से मिला हूँ
तो साँसों में नम चाल में उन ज़मानों का रम
अख़्तर उस्मान
नज़्म
नाज़ हो जिस को बहार-ए-मिस्र-ओ-शाम-ओ-रूम पर
सर-ज़मीन-ए-हिंद में देखे फ़ज़ा बरसात की
चकबस्त बृज नारायण
नज़्म
नाज़ हो जिस को बहार-ए-मिस्र-ओ-शाम-ओ-रूम पर
सर-ज़मीन-ए-हिंद में देखे फ़ज़ा बरसात की
चकबस्त बृज नारायण
नज़्म
हिन्द हो या पाक हो या रूस हो या बहर-ए-रुम
जिस तरफ़ उठती हैं नज़रें हैं वहाँ फ़ित्नों की धूम
नज़ीर फ़तेहपूरी
नज़्म
हाँ इस के दबाने से बिजली की रौशनी गुल हो जाती है
समझी कि नहीं ये कमरा है हाँ मेरा ड्राइंग-रूम है ये
सलाम मछली शहरी
नज़्म
शाज़िया अकबर
नज़्म
मुर्दा दिलों में अक्सर फूंकी है रूह तू ने
हम ने तिरी सदा की देखी है जाँ-फ़ज़ाई