aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "sahn"
छोटे से इक मकान में कच्ची ज़मीं का सहनकच्ची ज़मीं के सहन में खिलता हुआ गुलाब
हर बुन-ए-मू से टपकना चाहाऔर कहीं दूर तिरे सहन में गोया
उन के सहन में सूरज देर में निकलते हैं
मिरे मकान के आगे है एक चौड़ा सहन वसीअकभी वो हँसता नज़र आता है कभी वो उदास
मुझे ख़ामुशी में क़रार हैमिरे सहन-ए-गुलशन-ए-इश्क़ में
रात जागी तो कहीं सहन में सूखे पत्तेचरमराए कि कोई आया कोई आया है
सहन-ओ-दीवार की जुम्बिश है तो दर हिलते हैंबाहर आया तो ये देखा कि शजर हिलते हैं
ऐ हसन काश तू जान सकताकि इस सहन ख़ाना से दहलीज़ तक के सफ़र में
और सुब्ह को वो नाज़िर-ए-नज़्ज़ारा-ए-क़ुदरततरफ़-ए-चमन-ओ-सहन-ए-बयाबाँ में मिलेगा
दरवाज़ों से मेरा इक इक राज़ अयाँ हैमेरे सहन में दुश्मन की साज़िश रक़्साँ है
इस खंडर का वो हिस्सा थातब सहन उसे हम कहते थे
इस सहन-ए-जिस्म-ओ-जाँ में भीगुल चाँदनी का पेड़ है!
अब मिरे सहन की दीवार के उस पार नहीं कोई दरख़्तअब वहाँ एक इमारत है बहुत ऊँची सी
नहीं आया मेरे घर मेंरहा रूखा सहन मेरा
जब कोई आरज़ू दीवार फलाँग करसहन में आ गिरती और मैं
सहन में गिरते हैंगुज़रे दिन कब फिरते हैं
तुम्हें मालूम है नाहमारा सहन छोटा है और उस में चंद ख़्वाब ही ब-मुश्किल पूरे उतरते हैं
सहन में खेलें बताशे अब्र से बरसे हुएबर्तनों के पास पत्तल रात के पर्से हुए
बर्क़-रफ़्तार से सहन से होती हुईजा कर अपनी ख़्वाब-गाह में
छोटे छोटे त्यौहारों की कैसी ख़ुशियाँ थींहम फुलझड़ियाँ ले कर सहन में भागे फिरते थे
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