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नज़्म
ये बातें झूटी बातें हैं ये लोगों ने फैलाई हैं
तुम 'इंशा'-जी का नाम न लो क्या 'इंशा'-जी सौदाई हैं
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
जब रोता है बहज़ाद-ए-'हज़ीं' वो शाइ'र वो दीवाना सा
वो दिल वाला वो सौदाई वो दुनिया से बेगाना सा
बहज़ाद लखनवी
नज़्म
प्रेम ने सब को एक किया है प्रेम के हम शैदाई हैं
भारत नाम के आशिक़ हैं हम भारत के सौदाई हैं
हामिदुल्लाह अफ़सर
नज़्म
हर इक महफ़िल में होती है यहाँ हंगामा-आराई
कि अच्छे अच्छे इल्म-ओ-फ़न बनते हैं सौदाई
सय्यदा फ़रहत
नज़्म
हक़ का सौदाई हक़ीक़त का इल्म खोले हुए
सिद्क़ का शैदा सफ़ा का पासबाँ पैदा हुआ
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
जब किसी के गेसू-ए-पुर-ख़म की सौदाई थी तू
और लब-ए-साहिल पे रौज़ा की तमाशाई थी तू
सुरूर जहानाबादी
नज़्म
हज़ारों ज़ुल्फ़-ए-परी-वश के याँ थे सौदाई
हज़ारों मय-कश-ओ-मय-ख़्वार-ओ-मस्त-ओ-सहबाई
मोहम्मद अली तिशना
नज़्म
ज़लज़ले तुम से हैं वाबस्ता तुम्हें क्या मालूम
आज हलचल सी मची है दिल-ए-सौदाई में
सफ़दर आह सीतापुरी
नज़्म
क्यूँकि 'आज़ुर्दा' निकल जाए न सौदाई हो
क़त्ल इस तरह से बे-जुर्म जो सहबाई हो