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नज़्म
वो गप शप क़हक़हे वो अपने अपने इश्क़ के क़िस्से
वो मीरास रोड की बातें वो चर्चे ख़ूब-रूयों के
ख़लील-उर-रहमान आज़मी
नज़्म
किसी कंजूस के कमरे में जा कर बैठ जाते हैं
और उस के नाम पर टुक शाप से चीज़ें मंगाते हैं
सय्यद मोहम्मद जाफ़री
नज़्म
वो हस्ती की सरहद-ए-आख़िर हुआ जहाँ हर सफ़र तमाम
बेबस है इंसाँ बेबस है तकती रह गई रोती शाम
फ़हमीदा रियाज़
नज़्म
जब कभी बिकता है बाज़ार में मज़दूर का गोश्त
शाह-राहों पे ग़रीबों का लहू बहता है