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नज़्म
कैलाश माहिर
नज़्म
जिस तरह शोर-ए-ग़म-ए-दिल में तिलिस्म-ए-ख़ामुशी
इस तरह रहती है मेरे दिल में तेरी आरज़ू
ऋषि पटियालवी
नज़्म
मिरी दुनिया में कुछ वक़अत नहीं है रक़्स ओ नग़्मा की
मिरा महबूब नग़्मा शोर-ए-आहंग-ए-बग़ावत है
साहिर लुधियानवी
नज़्म
हमारी झील के पानी में इक चुप सी उतर आए
हमारी शाम की तन्हाइयों में शोर-ए-बाल-ओ-पर नहीं होगा