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नज़्म
मेरे साथ हर हाल में राज़ी थी मगर ज़िंदगी में शामिल न हो पाई
प्यार की राह में जो मेरी हम-सफ़र थी
आमिर रियाज़
नज़्म
पसीने से गिर्दाब-ए-साहिल हुआ है?
ये ला का सफ़र ला रहेगा कि कुछ इस का हासिल हुआ है
अख़्तरुल ईमान
नज़्म
मज़्मूम और ना'श ख़ुर्दा खेत के जैसे
जिस्म जिन में शहवत की मिक़दार सिफ़र है अकड़ जाएँगे
हसन अल्वी
नज़्म
और खंडर के दिल में जो नग़्मा-सरा था वो भी मैं
और सिफ़र के गुम्बदों में गूँजता था वो भी मैं
रियाज़ लतीफ़
नज़्म
हम सफ़्हा-ए-हस्ती पे रहे इस तरह बाक़ी
तफ़रीक़ में जिस तरह सिफ़र में से सिफ़र जाए