aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "sip"
मैं ने चाहा था उसे दिल में छुपा लूँ ऐसेजिस्म में जैसे लहू सीप में जैसे मोती
जो देखो मद्धम सी रौशनी मेंगुमाँ ये गुज़रे कि चाँद उतरे
चाय सिप करते हुएपी रहे हैं
चाय का एक सिपलगाते ही
मगररेत पर आ गिरी सीप उगलती हुई
फीकी हुई तो मुझ जैसीहँसते हँसते चाय का फिर सिप लिया मैं ने
सीप के पहलू से मोती के जुदा होने का ज़िक्रमौज की साहिल से टकरा कर बिखर जाने की बात
सीप होंटों में मोतियों की क़तारजब खिले गौहर-ए-सिफ़ात खिले
ज़मीं इक बड़ी सीप हैबीच बारिश का वहदानियत से लबालब भरा
कुंदन सी आत्माएँसब चंद्रमा से चेहरे
सपनों के महकते आँगन मेंकिरनें न बिखरें चाहत की
सीप के होंट पर एक मोती जड़ाइक सुनहरी हथेली पे हीरा पड़ा
कब तक यूँ हीमोती की तरह सीप में हम क़ैद रहेंगे
दर्द की सीप में एक भी बूँद मोती नहीं बन सकीदिल के कश्कोल में एक सिक्का मसर्रत का खनका नहीं
दर्द के इक सियह-रू समुंदर सेतन्हाइयों के सियह सीप लाया
हैराँ लब बस्ता बच्चोसाहिल पर सीप की मानिंद
कुछ सीप ख़ामोशी से मरते हैंजुदाई का सफ़र भी कुछ इसी अंदाज़ का दुख है
हाथों ही को आँख बनायापूँजी इक छोटी सी समेटी
चाय के सिप की शीरीनियों से वराआने वाले नए कल की बेचैनियों से परेशान है
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