aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "siraa"
लेकिनकहीं तो इस डोर का सिरा है
मुझ को भी तरकीब सिखा कोई यार जुलाहेअक्सर तुझ को देखा है कि ताना बुनते
वो बे-फ़िक्र दुनिया वो लफ़्ज़ों के दफ़्तरकि जिन का सिरा था न कोई ठिकाना
ख़ुर्शीद सिरा पर्दा-ए-मशरिक़ से निकल करपहना मिरे कोहसार को मल्बूस-ए-हिनाई
मस्ती के क़दम सँभले सँभले आँचल का सिरा ढलका ढलकाये हुस्न-ओ-जवानी रंग-ओ-अदा मेरे लिए क्या है कुछ भी नहीं
हसन वक़्त मालिक भी है देवता भीमुहाफ़िज़ भी है और ख़्वाजा-सरा भी
तू अगर सैर को निकले तो उजाला हो जाएसुरमई शाल का डाले हुए माथे पे सिरा
बोलती हैं तो लफ़्ज़ों का ग़ाएब सिराजुमला उन का अधूरा ही पल्ले पड़ा
न इस सिरे का पता है न वो सिरा मा'लूम
नज़र जिस सम्त भी फेंकोयहाँ ऊँची इमारत के सिवा कुछ भी नहीं है
अपनी वहशत का सिरामुबाशरत की जगह
या तमाशा सीना-ए-शमशीर से बाहर दम-ए-शमशीर कामौजों में बहता
अपनी ताबीर में ढलते हुए अफ़्सूँ का सिराजाने किस तौर कफ़-ए-ख़्वाब से छुट जाता है
मेरी ज़ंजीर का सिरा किस के पास है?क़यामत के शोर से पहले
गुज़रती रही मैंसिरा आख़िरी जब
फिर बड़े उलझाओ हैं जिन का सिरा अब तक नहीं मिलतातुम्हें लाज़िम है वहदानी ख़तों में उन का मतलब खोल कर लिखना
कोई सिरा नहीं मिल रहा हैऔर में किनारे पे खड़ी हुई
समुंदरों से लिपटने वाली हवा की अन-देखी डोरियों काकोई सिरा हाथ में नहीं है
इल्म की वुसअ'त का कोई भी सिरा होता नहींइल्म की कश्ती का कोई नाख़ुदा होता नहीं
इस गली का सिरा भी कहीं की सड़क पर ही उगलेगातारीक मुँह फ़ाड़ती
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