आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "soche"
नज़्म के संबंधित परिणाम "soche"
नज़्म
पर लिक्खे तो क्या लिक्खे? और सोचे तो क्या सोचे?
कुछ फ़िक्र भी मुबहम है कुछ हाथ लरज़ता है
ज़ेहरा निगाह
नज़्म
मैं हूँ ऐसा पात हवा में पेड़ से जो टूटे और सोचे
धरती मेरी गोर है या घर ये नीला आकाश जो सर पर
अख़्तरुल ईमान
नज़्म
लेकिन वो तो इस मेले में चलता जा रहा है
बिना सोचे कि उस के चलते जाने का भला अंजाम क्या होगा
अमीर इमाम
नज़्म
कौन सोचे कि सूरज के हाथों में क्या है
हवाओं की तहरीर पढ़ने की फ़ुर्सत किसी को नहीं
असअ'द बदायुनी
नज़्म
रूह लबों तक आ कर सोचे कैसे छोड़ूँ क़र्या-ए-जाँ
यूसुफ़ क़स्र-ए-शही में भी कब भूला कनआँ की गलियाँ
अहमद नदीम क़ासमी
नज़्म
यूँ सुर्ख़ से तुले हैं ये पपड़ियाँ समोसे
जो इक नज़र भी देखे खाने की बात सोचे