आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "sohbat-e-piir-e-ruum"
नज़्म के संबंधित परिणाम "sohbat-e-piir-e-ruum"
नज़्म
पीर-ए-जोश-ए-शबाब क्या जाने
शोरिश-ए-इज़्तिराब क्या जाने
सीना-ए-इंक़लाब छलनी है
शाएर-ए-इंक़लाब क्या जाने
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
मुझे लगता है अब साग़र भी जैसे एक मय-ख़ाना
निगाह-ए-ख़ास है जब से तिरी ऐ पीर-ए-मय-ख़ाना
अशरफ़ बाक़री
नज़्म
मिरी क़िस्मत में इस मय-ख़ाने का साग़र नहीं यारब
एवज़ में इस के मुझ को मशरब-ए-पीर-ए-मुग़ाँ दे दे
मोहम्मद सादिक़ ज़िया
नज़्म
शाइ'र-ए-हिन्दोस्ताँ ऐ शाइ'र-ए-जादू-बयाँ
हिन्द के ख़ुम-ख़ाना-ए-इरफ़ाँ के ऐ पीर-ए-मुग़ाँ