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नज़्म
दश्त-ए-शब में इस घड़ी चुप-चाप है शायद रवाँ
साक़ी-ए-सुब्ह-ए-तरब नग़्मा-ब-लब साग़र-ब-कफ़
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
तितलियाँ अपने परों पर पा के क़ाबू हर तरफ़
सेहन-ए-गुलशन की रविश पर रक़्स फ़रमाने लगीं
सय्यदा शान-ए-मेराज
नज़्म
ख़्वाबों के गुलिस्ताँ की ख़ुश-बू-ए-दिल-आरा है
या सुब्ह-ए-तमन्ना के माथे का सितारा है
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
नर्म-रफ़्तारी हो वक़्त-ए-सैर-ए-गुलज़ार-ए-तरब
राह-ए-पुर-ख़ार-ए-अमल में गर्म-रफ़्तारी भी हो
अर्श मलसियानी
नज़्म
दुनिया तिरे ख़याल में है चश्मा-ए-सराब
रंगीनी-ए-निशात-ओ-तरब ख़्वाब-ए-दोश है
चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी
नज़्म
जी के मैं क्या करूँ दुनिया में मिरा काम है क्या
ख़ून उम्मीद का होता है सर-ए-बज़्म-ए-तरब
राबिया सुलताना नाशाद
नज़्म
ठीक कर देगा फ़लक इन की भी अक़्लों का फ़ुतूर
रविश-ए-बज़्म-ए-तरब इन की भी बदलेगी ज़रूर