आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "switch"
नज़्म के संबंधित परिणाम "switch"
नज़्म
रेनडियर जी शाम सवेरे बर्फ़ में गाड़ी खींच रहे हैं
बैल हमारे सदियों से ये खेत हमारे सींच रहे हैं
मतीन अचलपुरी
नज़्म
अभी तो नेकियों के सींच कर नख़्ल-ए-तर-ओ-ताज़ा
अभी सहन-ए-स'आदत में लगाने की ज़रूरत थी
ऐश शुजाबादी
नज़्म
मैं जिन दरख़्तों को इक 'उम्र अपने अश्कों से
लहू से सींच के यूँ दिल-नशीं बनाता हूँ