aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "ta.DaKH"
मय-ए-आतिशीं में वो ज़हर थाकि तड़ख़ गए क़दह-ओ-सुबू
तड़ख़ के गर्द की तह से अगर कहीं कुछ फूलखिले भी, कोई तो देखेगा कौन देखेगा
ताख़ तड़ाख़!
चोब-ए-ख़ुश्क तड़ख़ रही थी सवेर सेबड़ी देर से यहाँ मरक़दों के गुलाब
कहीं भी कोई तड़ख़ नहीं थीये कौन हैं हम
मेरे दिल का ये शीशा इक अन-होने डर से तड़ख़ सा गया था कि जिस की सदा तक नहीं थीये वो डर था कि जिस की कोई एक तशरीह मुमकिन नहीं थी
और फिर तड़ाख़ से टूट जाएँगेहम वो मुर्दार लोग हैं जो समझते थे
वो इक टहनी तड़ख़ कर गिर पड़ीइक साँस टूटा
अचानक शोर सा उट्ठाज़मीं जैसे तड़ख़ जाए
रखती है जो कि मुझ को तबाह करने केसारे मंसूबे
हज़ार ग़म थे जो ज़िंदगी कीतलाश में थे ये जानता हूँ
ये दौर अपने बराहीम की तलाश में हैसनम-कदा है जहाँ ला-इलाहा-इल्लल्लाह
मिरी तलाश तिरी दिलकशी रहे बाक़ीख़ुदा करे कि ये दीवानगी रहे बाक़ी
मैं ख़ुशबुओं में तुम्हें मिलूँगामुझे गुलाबों की पत्तियों में तलाश करना
ताज़ा वीराने की सौदा-ए-मोहब्बत को तलाशऔर आबादी में तू ज़ंजीरी-ए-किश्त-ओ-नख़ील
मुझे नमक की कान में मिठास की तलाश हैबरहनगी के शहर में लिबास की तलाश है
तलाश में काम ही के शायद:''मैं शहर की इस मशीन में फ़िट हूँ जैसे ढिबरी,
अाया-ए-कायनात का म'अनी-ए-देर-याब तू!निकले तिरी तलाश में क़ाफ़िला-हा-ए-रंग-ओ-बू!
ख़ुदा ने क़ुरआन में कहा हैकि लोगो मैं ने
कि मैं तो तेरी तलाश के बे-कनार सहरा मेंवहम के बे-अमाँ बगूलों के वार सह कर
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