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नज़्म
जो नफ़स है हदफ़-ए-दशना-ए-क़ातिल है अभी
दिल के हर ज़ख़्म से रिसता है उमीदों का लहू
क़ैसर-उल जाफ़री
नज़्म
यही दस बीस अगर हैं कुश्तागान-ए-ख़ंजर-अंदाज़ी
तो मुझ को सुस्ती-ए-बाज़ू-ए-क़ातिल की शिकायत है
शिबली नोमानी
नज़्म
हमारे शेरों में मक़्तल के इस्तिआरे हैं
हमारे ग़ज़लों ने देखा है कूचा-ए-क़ातिल
मलिकज़ादा मंज़ूर अहमद
नज़्म
कहीं नहीं है कहीं भी नहीं लहू का सुराग़
न दस्त-ओ-नाख़ुन-ए-क़ातिल न आस्तीं पे निशाँ
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
इस मोहब्बत को परस्तिश से बदलना भूल है
ये तक़ाज़ा ये तवाज़ुन इस दिल-ए-कामिल में है