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नज़्म
अख़्तरुल ईमान
नज़्म
जब भी महताब-ए-ज़र-अफ़्शाँ के हो चेहरे पे नक़ाब
जान हम रख के हथेली पर उलट देते हैं
नूर-ए-शमा नूर
नज़्म
वो तख़्त-ए-सल्तनत-ओ-बारगाह-ए-सुल्तानी
कि जिस में बैठते थे आ के ज़िल्ल-ए-सुब्हानी
मोहम्मद अली तिशना
नज़्म
जलियाँ वाला राज सिंघासन आज़ादी का तख़्त-ओ-ताज
जामे' मस्जिद इस की इज़्ज़त बिरला मंदिर इस की लाज
कृष्ण प्रवेज़
नज़्म
क़ल्ब मेरा दौलत-ए-एहसास खो सकता नहीं
आब-ओ-ताब-ए-ज़र में ख़ुद्दारी डुबो सकता नहीं
नख़्शब जार्चवि
नज़्म
कहीं ये ख़ूँ से फ़र्द-ए-माल-ओ-ज़र तहरीर करती है
कहीं ये हड्डियाँ चुन कर महल ता'मीर करती है
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
बर्फ़-ज़ारों को तिरे अन्फ़ास ने गरमा दिया
तेरे इस्तिग़्ना ने तख़्त-ए-सल्तनत ठुकरा दिया