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नज़्म
सड़कों पे हसीनों का ताँता जादू का परा चलता फिरता
साड़ी की लपेटूँ से जिन की छिलके है जवानी की सहबा
नुशूर वाहिदी
नज़्म
वो मेरा जो मौत के आगे बे-जिगरी से तनता है
वो मेरा जो आप न हो कुछ जिस की सब कुछ जनता है
अनवर साबरी
नज़्म
लोग ज़ालिम हैं हर इक बात का तअना देंगे
बातों बातों में मिरा ज़िक्र भी ले आएँगे
कफ़ील आज़र अमरोहवी
नज़्म
ऐ दिल पहले भी तन्हा थे, ऐ दिल हम तन्हा आज भी हैं
और उन ज़ख़्मों और दाग़ों से अब अपनी बातें होती हैं
साक़ी फ़ारुक़ी
नज़्म
या छोड़ें या तकमील करें ये इश्क़ है या अफ़साना है
ये कैसा गोरख-धंदा है ये कैसा ताना-बाना है
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
और कुछ देर में जब फिर मिरे तन्हा दिल को
फ़िक्र आ लेगी कि तन्हाई का क्या चारा करे