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नज़्म
तुलू-ए-सुब्ह-ए-फ़र्दा की मुनादी भी ज़रा सुन लो
ये एटम जब फटेगा तो क़यामत चार-सू होगी
कैलाश माहिर
नज़्म
रंग-ए-चमन बना है गरेबान-ए-सुब्ह-ए-ईद
दामान-ए-गुल से कम नहीं दामान-ए-सुब्ह-ए-ईद
मास्टर बासित बिस्वानी
नज़्म
शिकस्त-ए-पैकर-ए-महसूस ने तोड़ा हिजाब आख़िर
तुलू-ए-सुब्ह-ए-महशर बन के चमका आफ़्ताब आख़िर
हफ़ीज़ जालंधरी
नज़्म
और न जाने तुलू-ए-सुब्ह-ए-नजात कब हो
कि हम बुज़ुर्गान-ए-साहब-ए-इख़्तियार के फ़ैसले की साअत
इक़बाल कौसर
नज़्म
दलील-ए-सुब्ह-ए-रौशन है सितारों की तुनुक-ताबी
उफ़ुक़ से आफ़्ताब उभरा गया दौर-ए-गिराँ-ख़्वाबी
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
सोने वालों को पयाम-ए-सुब्ह-ए-नौ देती हुई
ख़्वाब की दुनिया उठी अंगड़ाइयाँ लेती हुई
मयकश अकबराबादी
नज़्म
सुब्ह-दम बाद-ए-सबा की शोख़ियाँ काम आ गईं
लाला-ओ-गुल को बग़ल-गीरी का मौक़ा मिल गया