aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "uchaaran"
शास्त्र और वेद के मंतर का उचारन कर केअहद-ए-माज़ी का इक आईना दिखाता आया
कशीद अब्र-ए-बहारी ख़ेमा अंदर वादी ओ सहरासदा-ए-आबशाराँ अज़ फ़राज़-ए-कोह-सार आमद
यूँ अचानक तिरे आरिज़ का ख़याल आता हैजैसे ज़ुल्मत में कोई शम्अ भड़क उठती है
यूँ अचानक तिरी आवाज़ कहीं से आईजैसे पर्बत का जिगर चीर के झरना फूटे
अचानक एक समुंदर बन गया हैसमुंदर नाव से लड़ने लगा है
कहता है कोई जूती न लेवे कहीं चुरानट-खट उचक्का चोर दग़ाबाज़ गठ-कटा
बस इक दिन दिल की लौह-ए-मुंतज़िर परआचानक
और फिर हर्फ़-ओ-नवा की न ज़रूरत होगीचश्म ओ अबरू के इशारों में मोहब्बत होगी
इन अंधेरों ने जब पीस डाला मुझेफिर अचानक कुएँ ने उछाला मुझे
अफ़्सोस-सद-अफ़्सोस कि शाहीं न बना तूदेखे न तिरी आँख ने फ़ितरत के इशारात!
जैसे रोते रोते अचानकहँस दे कोई मलूल
धीरे धीरे धूप चढ़ी थीऔर अचानक दिल में ये ख़्वाहिश उभरी थी
फिर अचानक किसी लम्हे में जो चटख़े पत्तेहम वही शौक़ के मारे हुए दौड़े आए
इन कोसों लम्बी दूरी मेंकहीं अचानक
ये शहर अचानक ही मगर जाग पड़ा हैआवाज़ें हिरासत में लिए मुझ को खड़ी हैं
अज़-कराँ-ता-ब-कराँ दहर पे मंडलाने लगेकिस तरह आएगी जिस रोज़ क़ज़ा आएगी
ये कह रही है इशारों में गर्दिश-ए-गर्दूंकि जल्द हम कोई सख़्त इंक़लाब देखेंगे
तू ने दिया आ के उभारा जहाँसमझे कि मुट्ठी में है सारा जहाँ
जम'अ होते हुए देखा मगर उस को मैं नेइस बरस बोसकी अठारह बरस की होगी
जो और की पगड़ी ले भागे उस का भी ओर उचक्का हैजो और पे चौकी बिठलावे उस पर भी धोंस-धड़क्का है
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