aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "ukhe.D"
और जिस की तेज़-रवी क़दम उखेड़ देती हैमुझे ठहरे पानी की तरह मत चाहो
हवस का आसेब इकाती उखेड़ फेंकने मेंतअम्मुल न करेगा
टल न सकते थे अगर जंग में अड़ जाते थेपाँव शेरों के भी मैदाँ से उखड़ जाते थे
कुछ ज़रा मुश्किल से खुलने वाला वो शीशम का दरवाज़ाकि जैसे कोई अक्खड़ बाप
ऐ ख़ुदावंदान-ए-ऐवान-ए-अक़ाएदऐ हुनर-मन्दान-ए-आईन-ओ-सियासत
अक़ाएद पर क़यामत आएगी तरमीम-ए-मिल्लत सेनया काबा बनेगा मग़रिबी पुतले सनम होंगे
शुऊर-ए-हिन्द के बचपन की यादगार-ए-अज़ीमकि ऐसे वैसे तख़य्युल की साँस उखड़ जाए
हैं सदा इस उधेड़-बुन में तबीबकि कोई नुस्ख़ा हाथ आए अजीब
उखड़ गई साँस पत्तियों कीचली गईं ऊँघ में हवाएँ
ऐ हसन मेरे एक इक दरीचे पेकोहना रिवायात ओ ज़ालिम अक़ाएद का जंगल उगा था
बड़ पीपल आँब नीब छुआरा खजूर ताड़सब ख़ाक होंगे जब कि फ़ना डालेगी उखाड़
सुनकुछ पत्ते और पत्तों के साथ कुछ हवा उखड़ गई है
कि उन की बुनियाद उखड़ चुकी है
राह में साँस उखड़ जाती है
मेरे दिल में उधेड़-बुन क्या हैमैं सितारों से जा के उलझा क्यूँ
दिलों के धागे उखड़ गए हैंशफ़ीक़ आँसू नहीं बचे हैं ग़मों के लहजे बदल गए हैं
वक़्त का चाक चल रहा हैज़मीन की साँस उखड़ रही है
कश्ती से लड़ रहे हैंतख़्ते उखड़ रहे हैं
कि अब शहरों में मार ओ अज़दर ओ कर्गस नहीं मिलतेकुतुब-ख़ानों में अफ़्क़ार-ओ-अक़ाएद जल्वा-फ़रमा हैं
सब कुछ उखाड़ के ले गयाक्या उसे भी?
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