आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "vaada-e-visaal"
नज़्म के संबंधित परिणाम "vaada-e-visaal"
नज़्म
आतिश-ए-सोज़ाँ में भी वो आह शौहर का ख़याल
और वो दिल में गर्मी-ए-हंगामा-ए-शौक़-ए-विसाल
सुरूर जहानाबादी
नज़्म
सुन ऐ फ़रेफ़्ता-ए-क़िस्सा-हा-ए-हिज्र-ओ-विसाल
अमीक़-तर हैं समुंदर से ज़िंदगी के निकात
अफ़सर सीमाबी अहमद नगरी
नज़्म
अपनी मन-मानी ही आख़िर में करेंगे अब तो
दहर को वादा-ए-पुर-कैफ़ से मिन्नत-कश-ए-एहसान करो
मख़मूर जालंधरी
नज़्म
रोज़ मुझ को वा'दा-ए-फ़र्दा पे जो टरख़ाए है
मैं तिरी चालों को समझूँ हूँ मुझे बहलाए है
ज़रीफ़ जबलपूरी
नज़्म
सब्र का फल लोग कहते हैं मिलेगा एक दिन
आह कब तक इंतिज़ार-ए-वा'दा-ए-फ़र्दा करूँ
जगदीश सहाय सक्सेना
नज़्म
ख़ुद अपने दिल का ख़ून फ़ज़ा में उछाल के
मज़मूँ लिखे हैं हम ने फ़िराक़ ओ विसाल के