आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "vaaliyo.n"
नज़्म के संबंधित परिणाम "vaaliyo.n"
नज़्म
अब्दुर्राहमान वासिफ़
नज़्म
थी फ़रिश्तों को भी हैरत कि ये आवाज़ है क्या
अर्श वालों पे भी खुलता नहीं ये राज़ है क्या
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
मगर गुज़ारने वालों के दिन गुज़रते हैं
तिरे फ़िराक़ में यूँ सुब्ह ओ शाम करते हैं