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नज़्म
इफ़्तिख़ार आरिफ़
नज़्म
कुछ तो है वज्ह-ए-दिल-आज़ारी-ओ-आहंग-ओ-सतेज़
वर्ना ये तब-ए-ख़ुश-अख़्लाक़-ओ-कम-आमेज़ भी है
मुस्तफ़ा ज़ैदी
नज़्म
काश तू मेरे लिए वजह-ए-कशूद-ए-कार हो
तेरी क़ुम से बख़्त-ए-ख़्वाबीदा मिरा बेदार हो
मयकश अकबराबादी
नज़्म
जानती है अपनी रुस्वाई को तो वज्ह-ए-नुमूद
सिंफ़-ए-नाज़ुक की खुली तौहीन है तेरा वजूद