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नज़्म
दिल में इक वक़्त-ए-तरब-नाक का अरमान लिए
ख़ुद को यूँ वक़्फ़-ए-ग़म-ओ-गर्दिश-ए-हालात न कर
फ़रीद इशरती
नज़्म
ब-ईं इनआम-ए-वफ़ा उफ़ ये तक़ाज़ा-ए-हयात
ज़िंदगी वक़्फ़-ए-ग़म-ए-ख़ाक-नशीनां कर दे
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
क़सम है उस जमाही की जो हो रुस्वा-कुन-ए-मस्ती
क़सम है उस जवानी की जो हो वक़्फ़-ए-ग़म-ए-हस्ती
अहसन अहमद अश्क
नज़्म
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
रोज़-ओ-शब मुंतज़िर-ए-दीद-ए-रुख़-ए-यार हूँ मैं
दिल है वक़्फ़-ए-ग़म-ए-आलाम कहाँ है आ जा
शकील बदायूनी
नज़्म
हुस्न हो जाएगा जब औरों का वक़्फ़-ए-ख़ास-ओ-आम
दीदनी होगा तिरे ख़ल्वत-कदे का एहतिमाम
जोश मलीहाबादी
नज़्म
दिल तेरे उस दोस्त का नाहक़ वक़्फ़-ए-सहर-ए-लिसानी था
मेरी समझ में अब आया वो जम-ओ-ख़र्च ज़बानी था
अली मंज़ूर हैदराबादी
नज़्म
ये ज़माना कैसा बदल गया न वो वलवले न वो हौसले
किसी वक़्त थे जो सनम-शिकन वो हैं आज वक़्फ़-ए-सनम-गिरी