aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "vasl-e-sham.a"
फ़र्दा महज़ फ़ुसूँ का पर्दा, हम तो आज के बंदे हैंहिज्र ओ वस्ल, वफ़ा और धोका सब कुछ आज पे रक्खा है
जिस्म पर वस्ल-ए-अबद-ताब की शीरीं दस्तकरूह का नुक़रई दर खोलती थी
हर एक वस्ल-ए-ख़ुदा-वंद की उमंग लिएकिसी पे करते हैं अब्र-ए-बहार को क़ुर्बां
(बहिश्त रख लो हमें ख़ुद अपना जवाब दे दो!)जिसे तमन्ना-ए-वस्ल-ए-म'अना
वस्ल-ए-हिज्राँ बहम हुए कितने2
वक़्त आ गया है वस्ल-ओ-मुकाफ़ात-ए-स्ल का
इधर अपनी कामयाबी से ये होती मेरी हालतग़म-ए-हिज्र तो न होता ग़म-ए-वस्ल-ए-यार होता
बा'द मेरे क्या ये मंसब कोई पाएगा कभीशोला-ए-शम्अ' सियह-पोश हुआ
मोहब्बत वस्ल-ओ-हिज्राँ कीअजब सी इक कहानी है
दर्द-ए-महरूमी-ए-जावेद हमारी क़िस्मतराहत-ए-वस्ल-ओ-मुलाक़ात के दर बंद रहे
वो नवा न बन जो फ़रेब-ए-राह-गुज़ार होवो फुसून-ए-अर्ज़-ओ-समा न बन
गाह परवाने की मय्यत पे खड़ी मिलती हैसूरत-ए-शम्अ' जहाँ गिर्या-कुनाँ है उर्दू
आख़िरी ये फ़सील गिर जाएफिर तो है वस्ल-ए-जावेदाँ जानाँ
वस्ल-ए-मालूमियत के हासिल परएक लम्हा ठहर सा जाता है
हमेशा वस्ल-ए-नफ़ी की सूरत मेंअपने फ़ातेह को मारती है
वस्ल-ए-मुमकिना के सब अहद छोड़ देते हैंबातों में खनक नापैद
बेकसी पर मिरी रोती है मिरी तन्हाईसिफ़त-ए-शम्अ' जब इस बज़्म में जलता हूँ मैं
वस्ल-ए-महबूब के तसव्वुर मेंमू-ब-मू चूर उज़्व उज़्व निढाल
कि वस्ल-ओ-फुर्क़त की सरहदों परजो इश्क़ पल पल मचल रहा है
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
Online Treasure of Sufi and Sant Poetry
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books