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नज़्म
ज़ाग़ दश्ती हो रहा है हम-सर-ए-शाहीन-अो-चर्ग़
कितनी सुरअ'त से बदलता है मिज़ाज-ए-रोज़गार
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
इन में कुछ लीडर सिफ़त थे और कुछ वालंटियर
झुण्ड में सुरख़ाब के हों जिस तरह ज़ाग़-ओ-ज़ग़न