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नज़्म
सड़ चुके इस के अनासिर हट चुका सोज़-ए-हयात
अब तुझे फ़िक्र-ए-इलाज-ए-दर्द-ए-इंसाँ है तो क्या
अफ़सर सीमाबी अहमद नगरी
नज़्म
मक़ाम-ए-अज़्मत-ए-इंसाँ को तू ने फ़ाश किया
जुमूद-बस्ता ग़ुलामी को पाश-पाश किया
अफ़सर सीमाबी अहमद नगरी
नज़्म
बे-कराँ इज्ज़ की जाँ-सोख़्ता वीरानी में
जिस में उगते नहीं दिल-सोज़ि-ए-इंसाँ के गुलाब
नून मीम राशिद
नज़्म
मुज़्दा-ए-अम्न-ओ-अमाँ सुल्ह का पैग़ाम है क्या
जंग-ए-आज़ादी-ए-इंसाँ का सर-अंजाम है क्या
फ़ज़लुर्रहमान
नज़्म
निज़ाम-ए-बज़्म-ए-इंसाँ क्यों सँवरने में नहीं आता
सियाही धुल नहीं जाती तबाही सो नहीं जाती