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नज़्म
हाँ देखा कल हम ने उस को देखने का जिसे अरमाँ था
वो जो अपने शहर से आगे क़र्या-ए-बाग़-ओ-बहाराँ था
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
ज़बान-ए-शुस्ता-ओ-रफ़्ता पे नस्तालीक़ बोली है
मुसल्ले पर मुरादाबाद के पानों की ढोली है
शोरिश काश्मीरी
नज़्म
मजीद अमजद
नज़्म
जवानियाँ हैं ज़ोर पर शबाब का ज़ुहूर है
ब-फ़ैज़-ए-क़ल्ब-ए-मुतमइन नज़र नज़र ग़यूर है
अर्श मलसियानी
नज़्म
हम अपने मुल्क पर क़ब्ज़ा करेंगे जिस तरह होगा
ज़बान-ए-बे-कसी से ख़त्म हुज्जत कर के छोड़ेंगे
अहमक़ फफूँदवी
नज़्म
जो मेरे साज़-ए-फ़ितरत में नया इक सोज़ भरना है
तू 'जौहर' और 'ज़फ़र' कैसी ज़बान-ए-नग़्मा-ख़्वाँ दे दे