आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "zabar"
नज़्म के संबंधित परिणाम "zabar"
नज़्म
फ़ितना-ए-फ़र्दा की हैबत का ये आलम है कि आज
काँपते हैं कोहसार-ओ-मुर्ग़-ज़ार-ओ-जूएबार
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
जोश मलीहाबादी
नज़्म
रात आख़िर हुई और बज़्म हुई ज़ेर-ओ-ज़बर
अब न देखोगे कभी लुत्फ़-ए-शबाना हरगिज़
अल्ताफ़ हुसैन हाली
नज़्म
मग़रिब ओ मशरिक़ नज़र आने लगे ज़ेर-ओ-ज़बर
इंक़लाब-ए-हिन्द है सारे जहाँ का इंक़लाब
ज़फ़र अली ख़ाँ
नज़्म
रात आख़िर हुई और बज़्म हुई ज़ेर-ओ-ज़बर
अब न देखोगे कभी लुत्फ़-ए-शबाना हरगिज़
अल्ताफ़ हुसैन हाली
नज़्म
तुझ बिन जहाँ है आँखों में अंधेर हो रहा
और इंतिज़ाम-ए-दिल है ज़बर ज़ेर हो रहा
मोहम्मद हुसैन आज़ाद
नज़्म
महमिल में वो बे-ख़्वाब है आलम की ख़बर से
क्या देखिए! क्या शक्ल हुई ज़ेर-ओ-ज़बर से