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नज़्म
कुछ इस तरह से बढ़ा दिल में ज़ौक़-ए-आज़ादी
कि रफ़्ता रफ़्ता तमन्ना जवान होती गई
सय्यदा शान-ए-मेराज
नज़्म
वो इल्म में अफ़लातून सुने वो शेर में तुलसीदास हुए
वो तीस बरस के होते हैं वो बी-ए एम-ए पास हुए
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
मैं ज़ौक़-ए-इल्म ले कर तुर्बत-ए-सय्यद पर आया हूँ
अक़ीदत के शगुफ़्ता फूल अपने साथ लाया हूँ
मोहम्मद सादिक़ ज़िया
नज़्म
तू कहाँ है ऐ कलीम-ए-ज़र्रा-ए-सीना-ए-इल्म!
थी तिरी मौज-ए-नफ़स बाद-ए-नशात-अफ़ज़ा-ए-इल्म
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
कौन होता है हरीफ़-ए-मय-ए-मर्द-अफ़्गन-ए-इल्म
किस के सर जाएगा अब बार-ए-गिरान-ए-उर्दू
मसऊद हुसैन ख़ां
नज़्म
मुतमइन है तू परेशाँ मिस्ल-ए-बू रहता हूँ मैं
ज़ख़्मी-ए-शमशीर-ए-ज़ौक़-ए-जुस्तुजू रहता हूँ मैं
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
निज़ाम-ए-तहसील-ए-इल्म बदला नया तसव्वुर अदब को बख़्शा
ललित-कलाओं को शांति के हसीन उन्वान से सजाया
रिफ़अत सरोश
नज़्म
न ज़ौक़-ए-जाम-ओ-मय-कदा न बुत-कदे की आरज़ू
न तौफ़ कू-ए-यार का न हसरतें न जुस्तुजू