माज़ी परस्त लोगों के लिए ग़ज़लें

यहाँ दस ऐसी ग़ज़लें हाज़िर

हैं, जो हर उस पढ़ने वाले को पसंद आएगा, जिसका ज़हन हाल के साथ-साथ माज़ी में भी भटकता है

बोलिए