मीराजी की दस बेहतरीन नज़्में

मीराजी उर्दू अदब में

अपने बिल्कुल मुख़्तलिफ़ रंग के लिए जाने जाते हैं। उनकी शायरी में इन्सानी वुजूद, उसके कर्ब और अज़िय्यत की रूदाद और मौजूदगी का बैन सुनाई देता है। हमने, उर्दू शायरी के बा-ज़ौक़ क़ारिईन के लिए मीराजी की दस बेहतरीन नज़्मों का इन्तेख़ाब किया है। पढ़िए और अपने दोस्तों के साथ शेयर भी कीजिए।

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क्लर्क का नग़्मा-ए-मोहब्बत

सब रात मिरी सपनों में गुज़र जाती है और मैं सोता हूँ

मीराजी

शराब

फ़ुज़ूल है

मीराजी

जातरी

एक आया गया दूसरा आएगा देर से देखता हूँ यूँही रात उस की गुज़र जाएगी

मीराजी

मुझे घर याद आता है

सिमट कर किस लिए नुक़्ता नहीं बनती ज़मीं कह दो

मीराजी

दूर किनारा

फैली धरती के सीने पे जंगल भी हैं लहलहाते हुए

मीराजी

महरूमी

मैं कहता हूँ तुम से अगर शाम को भूल कर भी किसी ने कभी कोई धुँदला सितारा न देखा

मीराजी

दिन के रूप में रात कहानी

रात के फैले अंधेरे में कोई साया नहीं

मीराजी

ना-रसाई

रात अँधेरी बन है सूना कोई नहीं है साथ

मीराजी

धोबी का घाट

जिस शख़्स के मल्बूस की क़िस्मत में लिखी है

मीराजी

लब-ए-जू-ए-बारे

एक ही पल के लिए बैठ के फिर उठ बैठी

मीराजी
बोलिए