फ़िराक़ गोरखपुरी की नज़्में

फ़िराक़ गोरखपुरी की ये

पाँच नज़्में उर्दू शायरी के पाठकों के लिए बेहद अहम् है . इन्हें पढ़ कर किसी पाठक को उर्दू भाषा का एक अनूठा ज़ायक़ा प्राप्त होता है .

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जुगनू

ये मस्त मस्त घटा, ये भरी भरी बरसात

फ़िराक़ गोरखपुरी

हिण्डोला

दयार-ए-हिन्द था गहवारा याद है हमदम

फ़िराक़ गोरखपुरी

आधी रात

1

फ़िराक़ गोरखपुरी

परछाइयाँ

1

फ़िराक़ गोरखपुरी

जुदाई

शजर हजर पे हैं ग़म की घटाएँ छाई हुई

फ़िराक़ गोरखपुरी
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