आशिक़ पर ग़ज़लें

आशिक़ पर ये शेरी इन्तिख़ाब

आशिक़ के किरदार की रंगा रंग तर्फ़ों को मौज़ू बनाता है। आशिक़ जिन लमहों को जीता है उन की कैफ़ियतें क्या होती हैं, वो दुख, दर्द, बे-चैनी, उम्मीद ओ ना-उम्मीदी किन एहसासात से गुज़ुरता है ये सब इस शेरी इन्तिख़ाब में है। ये शायरी इस लिए भी दिल-चस्प है कि हम सब इस आइने में अपनी अपनी शक्लें देख सकते हैं और अपनी शनाख़्त कर सकते हैं।

Jashn-e-Rekhta | 2-3-4 December 2022 - Major Dhyan Chand National Stadium, Near India Gate, New Delhi

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