आज फिर शानों पे बिखरी ज़ुल्फ़ है अल्लाह ख़ैर
लग रहा है आज फिर अह्द-ए-बग़ावत कर लिया
जिसे पुकारते फिरते हैं कू-ब-कू हम लोग
वो एक अहद-ए-तमन्ना है सिर्फ़ नाम नहीं
मिरा मिज़ाज नहीं है मगर मुझे 'फैज़ान'
किसी के वास्ते इक अहद से मुकरना है
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
आज फिर शानों पे बिखरी ज़ुल्फ़ है अल्लाह ख़ैर
लग रहा है आज फिर अह्द-ए-बग़ावत कर लिया
जिसे पुकारते फिरते हैं कू-ब-कू हम लोग
वो एक अहद-ए-तमन्ना है सिर्फ़ नाम नहीं
मिरा मिज़ाज नहीं है मगर मुझे 'फैज़ान'
किसी के वास्ते इक अहद से मुकरना है