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बेहिस समाज पर कहानियाँ

आह-ए-बेकस

प्रेमचंद

अपनी ईमानदारी, मेहनत और क़ानून-दानी के लिए मशहूर मुंशी सेवक राम के पास लोग अपनी अमानत रखा करते थे। मगर हक़ीक़त से पर्दा तब उठना शुरू हुआ जब बेवा मूंगा ब्राह्मनी ने मुंशी जी के पास कुछ रुपये अमानत रखे, जिन्हें बाद में मुंशी जी ने देने से मना कर दिया। इससे मूंगा पागल हो गई और एक आह के साथ उसने मुंशी के दरवाजे़ पर दम तोड़ दिया। मूंगा की इस आह का ऐसा असर हुआ कि मुंशी का पूरा ख़ानदान ही तबाह हो गया।

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