मैं उस की धुन में नए रास्ते पे जा निकली
दयार-ए-जाँ से मिरी रोज़ जो गुज़रता रहा
बस ये इक ख़ाना-पुरी है करते रहिए दस्तख़त
पूछिए मत क्या ख़ता है इस दयार-ए-मीर में
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
मैं उस की धुन में नए रास्ते पे जा निकली
दयार-ए-जाँ से मिरी रोज़ जो गुज़रता रहा
बस ये इक ख़ाना-पुरी है करते रहिए दस्तख़त
पूछिए मत क्या ख़ता है इस दयार-ए-मीर में