पत्थर में धड़कती ज़िंदगी: मूर्ति कला में नग्नता का कलात्मक और रूहानी तर्क
माइकल एंजेलो, रोडिन और एपस्टीन जैसे अज़ीम मूर्तिकारों ने नग्नता को इंसानी जज़्बात की शिद्दत, रूहानियत और विकासवादी कशमकश को ज़ाहिर करने के लिए इस्तेमाल किया।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
माइकल एंजेलो, रोडिन और एपस्टीन जैसे अज़ीम मूर्तिकारों ने नग्नता को इंसानी जज़्बात की शिद्दत, रूहानियत और विकासवादी कशमकश को ज़ाहिर करने के लिए इस्तेमाल किया।