हास्य पर ग़ज़लें

सिफ़ारिश की ज़रूरत ही न होती

ग़ौस ख़ाह मख़ाह हैदराबादी

हमें कोई मतलब नहीं ला-मकाँ से

ग़ौस ख़ाह मख़ाह हैदराबादी

महल्ले भर में शोहरत हो गई है

मसरूर शाहजहाँपुरी
बोलिए