हास्य पर नज़्में

ख़ामोशी

अगरचे ये जहान-ए-रंग-ओ-बू है

ग़ौस ख़ाह मख़ाह हैदराबादी

सूरज

कभी जब ख़ुद से घबराता है सूरज

ग़ौस ख़ाह मख़ाह हैदराबादी

दी गई है

हमें जो ज़िंदगी दी गई है

ग़ौस ख़ाह मख़ाह हैदराबादी
बोलिए