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मनोविज्ञान पर कहानी

काली शलवार

सआदत हसन मंटो

एक पेशा करने वाली औरत सुल्ताना की आत्मा की पीड़ा और उसके अंत: के सन्नाटे को इस कहानी में बयान किया गया है। पहले ख़ुदा-बख़्श उसे प्यार का झांसा देकर अंबाला से दिल्ली लेकर आता है और उसके बाद शंकर मात्र काली शलवार के बदले उसके साथ जिस तरह का फ़रेब करता है इससे अंदाज़ा होता है कि मर्द की नज़र में औरत की हैसियत केवल एक खिलौने की सी है। उसके दुख-दर्द और इसके नारीत्व की उसे कोई परवाह नहीं।

उसका पति

सआदत हसन मंटो

यह कहानी शोषण, इंसानी अक़दार और नैतिकता के पतन की है। भट्टे के मालिक का अय्याश बेटा सतीश गाँव की ग़रीब लड़की रूपा को अपनी हवस का शिकार बनाकर छोड़ देता है। गाँव वालों को जब उसके गर्भवती होने की भनक लगती है तो रूपा का होने वाला ससुर उसकी माँ को बेइज्ज़त करता है और रिश्ता ख़त्म कर देता है। मामले को सुलझाने के लिए नत्थू को बुलाया जाता है जो समझदार और सूझबूझ वाला समझा जाता है। सारी बातें सुनने के बाद वह रूपा को सतीश के पास ले जाता है और कहता है कि वह रूपा और अपने बच्चे को संभाल ले लेकिन सतीश सौदा करने की कोशिश करता है जिससे रूपा भाग जाती है और पागल हो जाती है।

टेटवाल का कुत्ता

सआदत हसन मंटो

कहानी में मुख्य रूप से हिन्दुस्तानियों और पाकिस्तानियों के बीच की धार्मिक घृणा और पूर्वाग्रह को दर्शाया गया है। कुत्ता जो कि एक बेजान जानवर है, हिन्दुस्तानी फ़ौज के सिपाही केवल मनोरंजन के लिए उस कुत्ते का कोई नाम रखते हैं और वह नाम लिख कर उसके गले में लटका देते हैं। जब वो कुत्ता पाकिस्तान की सरहद की तरफ़ आता है तो पाकिस्तानी सैनिक उसे कोई कोड-वर्ड समझ कर सतर्क हो जाते हैं। दोनों तरफ़ के सैनिकों की ग़लत-फ़हमी के कारण उस कुत्ते पर गोली चला देते हैं।

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उल्लू का पट्ठा

सआदत हसन मंटो

क़ासिम एक दिन सुबह सो कर उठता है तो उसके अंदर यह शदीद ख्वाहिश जागती है कि वह किसी को उल्लू का पठ्ठा कहे। बहुत से ढंग और अवसर सोचने के बाद भी वह किसी को उल्लू का पठ्ठा नहीं कह पाया और फिर दफ़्तर के लिए निकल पड़ता है। रास्ते में एक लड़की की साड़ी साईकिल के पहिये में फंस जाती है, जिसे वह निकालने की कोशिश करता है लेकिन लड़की को नागवार गुज़रता है और वह उसे "उल्लू का पठ्ठा" कह कर चली जाती है।

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चौदहवीं का चाँद

सआदत हसन मंटो

प्राकृतिक दृश्यों का प्रेमी विल्सन की कहानी है जो एक बैंक में मैनेजर था। विल्सन एक बार जज़ीरे पर आया तो चौदहवीं के चाँद ने उसे इतना मंत्रमुग्ध और हैरान किया कि उसने सारी ज़िंदगी वहीं बसने का इरादा कर लिया और बैंक की नौकरी छोड़कर स्थायी रूप से वहीं रहने लगा, लेकिन जब कर्ज़दारों ने परेशान करना शुरू किया तो उसने एक दिन अपने झोंपड़े में आग लगा ली, जिसकी वजह से वह मानसिक रूप से सुन्न हो गया और कुछ दिनों बाद चौदहवीं का चाँद देख कर ही वह मर गया।

शारदा

सआदत हसन मंटो

यह एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो तवायफ़़ को तवायफ़़ की तरह ही रखना चाहता है। जब कोई तवायफ़ उसकी बीवी बनने की कोशिश करती तो वह उसे छोड़ देता। पहले तो वह शारदा की छोटी बहन से मिला था, पर जब उसकी शारदा से मुलाक़ात हुई तो वह उसे भूल गया। शारदा एक बच्चे की माँ है और देखने में ठीक-ठाक लगती है। बिस्तर में उसे शारदा में ऐसी लज्ज़त महसूस होती है कि वह उसे कभी भूल नहीं पाता। शारदा अपने घर लौट जाती है, तो वह उसे दोबारा बुला लेता है। इस बार घर आकर जब शारदा बीवी की तरह उसकी देखभाल करने लगती है तो वो उससे उक्ता जाता है और उसे वापस भेज देता है।

तरक़्क़ी पसंद

सआदत हसन मंटो

तंज़-ओ-मिज़ाह के अंदाज़ में लिखी गई यह कहानी तरक्क़ी-पसंद अफ़साना-निगारों पर भी चोट करता है। जोगिंदर सिंह एक तरक्क़ी-पसंद कहानी-कार है जिसके यहाँ हरेंद्र सिंह आकर डेरा डाल देता है और निरंतर अपनी कहानियाँ सुना कर बोर करता रहता है। एक दिन अचानक जोगिंदर सिंह को एहसास होता है कि वो अपनी बीवी की हक़-तल्फ़ी कर रहा है। इसी ख़्याल से वो हरेंद्र से बाहर जाने का बहाना करके बीवी से रात बारह बजे आने का वादा करता है। लेकिन जब रात में जोगिंदर अपने घर के दरवाज़े पर दस्तक देता है तो उसकी बीवी के बजाय हरेंद्र दरवाज़ा खोलता है और कहता है जल्दी आ गए, आओ, अभी एक कहानी मुकम्मल की है, इसे सुनो।

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साढ़े तीन आने

सआदत हसन मंटो

इस कहानी में सत्ताधारी और शासक वर्ग पर शदीद तंज़ किया गया है। रिज़वी जेल से बाहर आने के बाद एक कैफे़ में बैठ कर फ़ल्सफ़ियाना अंदाज़ में सामाजिक अन्याय की बात करता है कि किस तरह ये समाज एक-एक ईमानदार इंसान को चोर और क़ातिल बना देता है। इस सिलसिले में वो फग्गू भंगी का ज़िक्र करता है जिसने बड़ी ईमानदारी से उसके दस रुपये उस तक पहुँचाए थे। ये वही फग्गू भंगी है जिसको वक़्त पर तनख़्वाह न मिलने की वजह से साढे़ तीन आने चोरी करने पड़ते हैं और उसे एक साल की सज़ा मिलती है।

हारता चला गया

सआदत हसन मंटो

एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जिसे जीतने से ज़्यादा हारने में मज़ा आता है। बैंक की नौकरी छोड़ने के बाद फ़िल्मी दुनिया में उसने बे-हिसाब दौलत कमाई थी। यहाँ उसने इतनी दौलत कमाई कि वह जितना ख़र्च करता उससे ज़्यादा कमा लेता। एक रोज़ वह जुआ खेलने जा रहा था कि उसे इमारत के नीचे ग्राहकों को इंतज़ार करती एक वेश्या मिली। उसने उसे दस रूपये रोज़ देने का वादा किया, ताकि वह अपना धंधा बंद कर सके। कुछ दिनों बाद उसने देखा कि वह वेश्या फिर खिड़की पर बैठी ग्राहक का इंतेज़ार कर रही। पूछने पर उसने ऐसा जवाब दिया कि वे व्यक्ति ला-जवाब हो कर ख़ामोश हो गया।

क़ादिरा क़साई

सआदत हसन मंटो

अपने ज़माने की एक ख़ूबसूरत और मशहूर वेश्या की कहानी। उसके कोठे पर बहुत से लोग आया करते थे। सभी उससे मोहब्बत का इज़हार किया करते थे। उनमें एक ग़रीब शख़्स भी उससे मोहब्बत का दावा करता था। वेश्या ने उसकी मोहब्बत को ठुकरा दिया। वेश्या के यहाँ एक बेटी हुई। वह भी बहुत ख़ूबसूरत थी। जिन दिनों उसकी बेटी की नथ उतरने वाली थी उन्हीं दिनों देश का विभाजन हो गया। इसमें वेश्या मारी गई और उसकी बेटी पाकिस्तान चली गई। यहाँ भी उसने अपना कोठा जमाया। जल्द ही उसके कई चाहने वाले निकल आए। वह जिस शख़्स को अपना दिल दे बैठी थी वह एक क़ादिरा कसाई था, जिसे उसकी मोहब्बत की कोई ज़रूरत नहीं थी।

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सुर्मा

सआदत हसन मंटो

फ़हमीदा को सुर्मा लगाने का बेहद शौक़ था। शादी के बाद शौहर के टोकने पर उसने सुर्मा लगाना छोड़ दिया। फिर उसने नवजात बच्चे के सुर्मा लगाना शुरू किया लेकिन वो डबल निमोनिया से मर गया। एक दिन जब फ़हमीदा के शौहर ने उसे जगाने की कोशिश की तो वो मुर्दा पड़ी थी और उसके पहलू में एक गुड़िया थी जिसकी आँखें सुर्मे से भरी हुई थीं।

नफ़सियात शनास

सआदत हसन मंटो

यह कहानी एक ऐसे शख़्स की है जो अपने घरेलू नौकर पर मनोवैज्ञानिक अध्ययन करता है। उसके यहाँ पहले दो सगे भाई नौकर हुआ करते थे। उनमें से एक बहुत चुस्त था तो दूसरा बहुत सुस्त। उसने सुस्त नौकर को हटाकर उसकी जगह एक नया नौकर रख लिया। वह बहुत होशियार और पहले वाले से भी ज़्यादा चुस्त और फुर्तीला था। उसकी चुस्ती और फ़ुर्ती इतनी ज़्यादा थी कि कभी-कभी वह उसके काम करने की तेज़ी को देख कर झुंझला जाता था। उसका एक दोस्त उस नौकर की बड़ी तारीफ़ किया करता था। इससे प्रभावित हो कर एक रोज़ उसने नौकर की गतिविधियों का मनोवैज्ञानिक अध्ययन करने की ठानी और फिर...

क़ासिम

सआदत हसन मंटो

अफ़साना घरों में काम करने वाले बच्चों के शोषण पर आधारित है। क़ासिम इंस्पेक्टर साहब के यहाँ नौकर था। वह बहुत कम-उम्र था फिर भी उस से घर-भर के काम लिए जाते थे। इतने कामों के कारण उसकी नींद भी पूरी नहीं हो पाती थी। काम से बचने के लिए उसने एक रोज़़ चाकू़ से अपनी उँगली काट ली। उसका यह तरीक़ा काम कर गया। उसे कई दिन के लिए काम से छुट्टी मिल गई। ठीक होने के कुछ दिन बाद ही उसने फिर से अपनी अंगुली काट ली। मगर जब उसने तीसरी बार उँगली काटी तो मालिक ने तंग आ कर उसे घर से निकाल दिया। दवाई के अभाव में क़ासिम की ताज़ा कटी उँगली में सैप्टिक हो गया। जिस कारण डॉक्टर को उसका हाथ काटना पड़ा। हाथ कटने पर वह भीख माँगने का धंधा करने लगा।

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मिस फ़रिया

सआदत हसन मंटो

यह एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो शादी के एक महीने बाद ही अपनी बीवी के पेट से रह जाने पर परेशान हो जाता है। इससे छुटकारा पाने के लिए वह कई उपाय सोचता है, लेकिन कोई उपाय कारगर नहीं होती। आख़िर में उसे लेडी डॉक्टर मिस फ़रिया याद आती है, जो उसकी बहन के बच्चा होने पर उनके घर आई थी। जब वह डाक्टर को उसकी डिस्पेंनशरी पर छोड़ने गया था तो उसने उसका हाथ पकड़ लिया था। फिर माफ़ी माँगते हुए उसका हाथ छोड़ दिया था। अब जब उसे फिर उस घटना की याद आई तो वह हँस पड़ा और उसने यथास्थिति को क़बूल कर लिया।

डरपोक

सआदत हसन मंटो

यह कहानी एक ऐसे शख़्स की है जो औरत की शदीद ख़्वाहिश होने के चलते रंडीख़ाने पर जाता है। उसने अभी तक की अपनी ज़िंदगी में किसी औरत को छुआ तक नहीं था। न ही उसने अभी तक किसी से इज़हार-ए-मोहब्बत किया था। ऐसा नहीं था कि उसे कभी कोई मौक़ा न मिला हो। मगर उसे जब भी कोई मौक़ा मिला वह किसी अनजाने ख़ौफ़़ के चलते उस पर अमल न कर सका। मगर पिछले कुछ दिनों से उसे औरत की बेहद ख़्वाहिश हो रही थी। इसलिए वह उस जगह तक चला आया था। रंडीख़ाना उससे एक गली दूर था, पर पता नहीं किस डर के चलते उस गली को पार नहीं कर पा रहा था। अंधेरे में तन्हा खड़ा हुआ वह आस-पास के माहौल को देखता है और अपने डर पर क़ाबू पाने की कोशिश करता है। मगर इस से पहले कि वह डर को अपने क़ाबू में करे, डर उसी पर हावी हो गया और वह वहाँ से ऐसे ही ख़ाली हाथ लौट गया।

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नया साल

सआदत हसन मंटो

यह ज़िंदगी से संघर्ष करते एक अख़बार के एडिटर की कहानी है। हालाँकि उसे उस अख़बार से दौलत मिल रही थी और न ही शोहरत। फिर भी वह अपने काम से ख़ुश था। उसके विरोधी उसके ख़िलाफ़ क्या कहते हैं? लोग उसके बारे में क्या सोचते हैं? या फिर दुनिया उसकी राह में कितनी मुश्किलें पैदा कर रही है, इससे उसे कोई मतलब नहीं था। उसे तो बस मतलब है अपने रास्ते में आने वाली हर रुकावट को दूर करने से। यही काम वह पिछले चार साल से करता आ रहा था और अब जब नए साल का आग़ाज़ होने वाला है तो वह उससे भी मुक़ाबले के लिए तैयार है।

कुत्ते की दुआ

सआदत हसन मंटो

अफ़साना एक कुत्ते की अपने मालिक के प्रति वफ़ादारी की एक अनोखी दास्तान बयान करता है। उस शख़्स ने अपनी और अपने गोल्डी कुत्ते की कहानी सुनाते हुए बीती ज़िंदगी की कई घटनाओं का ज़िक्र किया। इन घटनाओं में उन दोनों के आपसी संबंधों और एक-दूसरे के प्रति लगाव के बारे में कई प्रेरिक प्रसंग थे। मगर हक़ीक़ी कहानी तो वह थी कि जब एक बार मालिक बीमार पड़ा तो कुत्ते ने उसके लिए ऐसी दुआ माँगी कि मालिक तो ठीक हो गया, पर कुत्ता अपनी जान से जाता रहा।

मेरा हमसफ़र

सआदत हसन मंटो

अलीगढ़ से अमृतसर लौटते एक छात्र की कहानी है। वह ट्रेन में सवार हुआ तो उसे अलविदा कहने आए उसके साथी ने उससे कोई ऐसी बात कही कि उसने उसे पागल कहकर झटक दिया। ट्रेन में उसके साथ सफ़र कर रहे नौजवान ने सोचा कि वह उसे पागल कह रहा है। बात करने पर पता चला कि वह नौजवान अपने घर से सिर्फ़ इसलिए निकल आया है क्योंकि उसका यहूदी बाप उसे पागल कहता है। इसी कारण उसकी बीवी भी उसे छोड़कर अपने मायके चली जाती है।

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परेशानी का सबब

सआदत हसन मंटो

यह अफ़साना एक ऐसे शख़्स की दास्तान बयान करता है जो अपने एक दोस्त के साथ घूमने जा रहा होता है। रास्ते में उसका दोस्त एक वेश्या के घर रुक जाता है। वहाँ उस वेश्या के साथ उनका झगड़ा हो जाता है। वेश्या उन सब लोगों के ख़िलाफ़़ मुक़द्दमा कर देती है। इस मुकद्दमे के चलते वह एक ऐसी परेशानी में घिर जाता है जिससे निकलने का उसे कोई रास्ता नज़र नहीं आता।

तक़ी कातिब

सआदत हसन मंटो

अफ़साना एक ऐसे मौलाना की दास्तान बयान करता है जो अपने जवान बेटे की शादी के ख़िलाफ़़ है। जवानी में उसकी बीवी की मौत हो गई थी और उसने ही बेटे को माँ और बाप दोनों बनकर पाला था। मगर अब वह जवान हो गया था और उसे एक औरत की शदीद ज़रूरत थी। पर मौलाना थे कि उसकी शादी ही नहीं करना चाहते थे। जहाँ भी उसकी शादी की बात चलती, वह किसी न किसी बहाने से उसे रुकवा देते। आख़िर में उसने मौलाना के ख़िलाफ़़ जाकर शादी कर ली और उन्हें छोड़कर दिल्ली चला गया। वहाँ जाकर उसने अपने मौलवी पिता की ख़ैरियत जानने के लिए ख़त लिखा और साथ ही सलाह दी कि वह भी अपनी शादी कर लें।

टेढ़ी लकीर

सआदत हसन मंटो

"एक आज़ादी पसंद, अज़ियत पसंद, साफ़-गो और डगर से हट कर कुछ अनोखा करने की धुन रखने वाले व्यक्ति की कहानी है जो अपनी इन्फ़िरादियत पसंदी के हाथों मजबूर हो कर एक रात अपनी निकाही बीवी को ही ससुराल से भगा ले जाता है।"

मेरा और उसका इंतिक़ाम

सआदत हसन मंटो

यह एक शोख़, चंचल और चुलबुली लड़की की कहानी है, जो सारे मोहल्ले में हर किसी से मज़ाक़ करती फिरती है। एक दिन जब वह अपनी सहेली बिमला से मिलने गई तो वहाँ बिमला के भाई ने उससे इंतक़ाम लेने के लिए झूठ बोलकर घर में बंद कर लिया और उसके गीले होंटो को चूम लिया। वहाँ वह शाम तक बंद रही। कुछ दिनों बाद जब बिमला को मौक़ा मिला तो वह भी अपना इंतक़ाम लेने से पीछे नहीं रही।

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चुप

मुमताज़ मुफ़्ती

यह एक ऐसे शख़्स की कहानी है जिसे अपने से दोगुनी उम्र की औरत से मोहब्बत हो जाती है। वह उसके इश्क़ में इस क़दर दीवाना हो जाता है कि उसके बिना एक पल भी रह नहीं पता। रात ढले जब वह उसके पास जाता है तो वह उसके होंठों पर उंगली रखकर उसे चुप कर देती है। फिर जब उसकी शौहर से तलाक़ हो जाती है तो वह अपनी माँ के ख़िलाफ़ जाकर उससे शादी कर लेता है। मगर शादी के बाद वह उसमें पहली वाली लज्ज़त महसूस नहीं कर पाता। बाद में वह उसे छोड़कर चली जाती है और दूसरे मर्द से शादी कर लेती है।

मोचना

सआदत हसन मंटो

यह एक ऐसी औरत की कहानी है जिसके चेहरे और जिस्म पर मर्दों की तरह बाल उग आते थे, जिनको उखाड़ने के लिए वह अपने साथ एक मोचना रखा करती थी। हालाँकि देखने में वह कोई ज़्यादा ख़ूबसूरत नहीं थी फिर भी उसमें कोई ऐसी बात थी कि जो भी मर्द उसे देखता उस पर आशिक़ हो जाता। इस तरह उसने बहुत से मर्द बदले। जिस मर्द के पास भी वह गई अपना मोचना साथ लेती गई। अगर कभी वह पुराने मर्द के पास छूट गया तो उसने ख़त लिखकर उसे मंगवा लिया। जब वह एक शायर को छोड़ कर गई तो उसने उसका मोचना देने से इंकार कर दिया ताकी रिश्ते की एक वजह तो बनी रहे।

घर तक

मुमताज़ शीरीं

अपने गाँव जाते एक ऐसे शख़्स की कहानी, जो रास्ता भटक गया है। उसके साथ एक सहायक भी है जिसे वह रास्ते में कहानी सुनाता है। रास्ता तलाश करते शाम हो जाती है तो उन्हें दूर से मशाल जलने और औरतों के रोने की आवाज़ आती है। क़रीब जाने पर पता चलता है कि रोने वाली उसकी माँ और बहन हैं। वे दोनों उसके छोटे भाई की क़ब्र के पास रो रही हैं, जिसके लिए वह शहर से खिलौने और कपड़े लेकर आया था।

नफ़्सियाती मुताला

सआदत हसन मंटो

इस कहानी में एक ऐसी लेखिका की दास्तान बयान की गई है जो मर्दों की मनोविज्ञान के बारे में लिखने के कारण मशहूर हो जाती है। कुछ लेखक दोस्त बैठे हैं और उसी लेखिका बिल्क़ीस के बारे में बातचीत कर रहे हैं। लेखक जिस घर में बैठे हैं उस घर की महिला बिल्क़ीस की दोस्त हैं। बातचीत के बीच में ही फ़ोन आता है और वह महिला बिल्क़ीस से मिलने चली जाती है। बिल्क़ीस उसे बताती है कि वह घर में सफ़ेदी कर रहे एक मज़दूर की मनोविज्ञान का अध्ययन कर रही थी, इसी बीच उसने उसे अपनी हवस का शिकार बना लिया।

शादी

अहमद अली

यह कहानी एक ऐसे शख़्स की है, जो पाँच साल तक पश्चिमी सभ्यता में पला-बढ़ा है। उसने वहाँ के साहित्य को पढ़ा और समाज में पूरी तरह रच बस गया है। जब वह हिंदुस्तान लौटता है तो परिवार वाले उसकी शादी करने के लिए कहते हैं मगर वह बिना देखे, मिले किसी लड़की से शादी करने पर राज़ी नहीं होता। तीन साल तक ना-नूकुर करने के बाद आख़िर-कार वह मान ही जाता है। शादी होने के बाद वह अनजान होने पर बीवी के पास जाने से कतराता है। फिर एक रात तन्हा लेटे हुए कुछ नॉवेल के हिस्से याद आते हैं और वह अपनी बीवी की चाहत में तड़प उठता है और उसके पास चला जाता है।

दो मुंही

मुमताज़ मुफ़्ती

कहानी दोहरे चरित्र से जूझती एक ऐसी औरत के गिर्द घूमती है, जो बाहरी तौर पर तो कुछ और दिखाई देती है मगर उसके अंदर कुछ और ही चल रहा होता है। अपनी इस शख़्सियत से परेशान वह बहुत से डॉक्टरों से इलाज कराती है मगर कोई फ़ायदा नहीं होता। फिर उसकी एक सहेली उसे त्याग क्लीनिक के बारे में बताती है और वह अपने शौहर से हिल स्टेशन पर घूमने का कहकर अकेले ही त्याग क्लीनिक में इलाज कराने के लिए निकल पड़ती है।

वक़ार महल का साया

मुमताज़ मुफ़्ती

वक़ार महल के मार्फ़त एक घर और उसमें रहने वाले लोगों के टूटते-बनते रिश्तों की दास्तान को बयान किया गया है। वक़ार महल कॉलोनी के बीच में स्थित है। हर कॉलोनी वाला उससे नफ़रत भी करता है और एक तरह से उस पर फ़ख्र भी। वक़ार महल को पिछले कई सालों से गिराया जा रहा है और वह अब भी जस का तस खड़ा है। मज़दूर दिन-रात काम में लगे ठक-ठक करते रहते हैं। उनकी ठक-ठक की उस आवाज़ से मॉर्डन ख़्याल की मॉर्डन लड़की ज़फ़ी के बदन में सिहरन सी होने लगती है और यही सिहरन उसे कई लोगों के पास ले जाती है और उनसे दूर भी करती है।