ADVERTISEMENT

गणतंत्र दिवस शायरी पर नज़्में

शायरी में वतन-परस्ती

के जज़्बात का इज़हार बड़े मुख़्तलिफ़ ढंग से हुआ है। हम अपनी आम ज़िंदगी में वतन और इस की मोहब्बत के हवाले से जो जज़्बात रखते हैं वो भी और कुछ ऐसे गोशे भी जिन पर हमारी नज़र नहीं ठहरती इस शायरी का मौज़ू हैं। ये अशआर पढ़िए और इस जज़बे की रंगारंग दुनिया की सैर कीजिए।

ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT

मेरा वतन

दिल-रुबा लाला हो फ़ज़ा तेरी

मीर सय्यद नज़ीर हुसैन नाशाद
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT